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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लांच की एमसैट सैटेलाइट ( (ISRO) launches MSAT Satellite)

 

 

 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लांच की एमसैट सैटेलाइट

Indian Space Research Organization (ISRO) launches MSAT Satellite

 

पहली बार अंतरिक्ष में जाते सैटेलाइट को 1000 लोगों ने LIVE देखा, ISRO ने किया खास इंतजाम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर पीएसएलवी सी45 को लांच कर दिया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से स्वदेशी सर्विलांस सैटेलाइट एमसैट के साथ 28 विदेशी नैनो सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा गया।
पीएसएलवी-सी45 ने एमिसैट को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। अब 28 विदेशी उपग्रहों को भी उनकी कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा। यह पूरा अभियान 180 मिनट में पूरा किया गया

 

कई देशों के उपग्रह हुए लॉन्च

इसरो ने आज पीएसएलवी-सी45 रॉकेट के द्वारा अपने एमिसैट को तो लॉन्च किए ही बल्कि कई अन्य देशों के उपग्रहों को भी लॉन्च किया. इनमें अमेरिका के 24, लिथुआनिया के दो व स्पेन व स्विट्जरलैंड के एक-एक उपग्रह शामिल रहे. इससे पहले भी भारत का इसरो एक साथ 104 उपग्रह भेजने का रिकॉर्ड बना चुका है.

 

 

जाने इसकी प्रमुख विशेषताये

1. एमसैट पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखेगा। यानी बॉर्डर पर यह सैटेलाइट रडार और सेंसर पर पैनी नजर बनाए रखेगा।

2. कम्युनिकेशन इंटेलिजेंस के जरिए यह पता लगाएगा कि उस क्षेत्र में कितने कम्युनिकेशन डिवाइस सक्रिय हैं।

3. सीमा पर तैनात सेंसर के जरिए दुश्मन के क्षेत्र की सटीक स्थलाकृति का पता लगाने में मदद करेगा।

4. रात के अंधेरे मे भी तस्वीरें खींचने में सक्षम है।

5. इसके जरिए दुश्मन के हथियारों और सैन्य पूंजी के बारे में पता लगाने में मदद मिलेगी।

6. एमसैट समुद्री उपग्रह प्रयोगों के लिए इसरो की स्वचालित पहचान प्रणाली है जो जहाजों से प्रेषित संदेशों को कैप्चर करते हैं।

7. एमसैट (रेडियो एमेच्योर सैटेलाइट कॉर्पोरेशन), भारत से ऑटोमैटिक पैकेट रिपीटिंग सिस्टम, पोजीशन डाटा की निगरानी और शौकिया रेडियो ऑपरेटरों की सहायता करेगा।

8. यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम की जांच करेगा।

9. डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेश में निर्मित 436 किलोग्राम वजन वाली इस सैटेलाइट से भारतीय सर्विलांस मजबूत बनेगा।

10. पृथ्वी की 749 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित होने के कारण यह रडार नेटवर्क की निगरानी करेगा

11. मोबाइल और संचार उपकरणों के जरिए होने वाली बातचीत को डिकोड करेगा

 

 

 

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