Microreactor developed by ARI produces uniform size of nanoparticles — a major requirement in biomedical technology


Microreactor developed by ARI produces uniform size of nanoparticles — a major requirement in biomedical technology


 

 

Scientists from Pune based Agharkar Research Institute (ARI), an autonomous institute under the Department of Science & Technology (DST), Govt. of India have developed a microreactor that that can produce large quantities of uniform size of nanoparticles, thus serving a major requirement in biomedical technology.

The device could synthesize metal, semiconductor, and polymer nanoparticles by continuous flow active microreactor. Dr Dhananjay Bodas and his team from ARI who put together this microreactor on the basis of their earlier studies published in the journals Materials Science and Engineering and ACS Applied Materials and Interface also discovered that the parameters such as concentration of reactants, flow rate, agitation, reaction temperature as well as time, determined the size of nanoparticles and their distribution.

They further derived a mathematical equation using dimensional analysis to predict process parameters accurately for achieving true monodispersity (maintaining a uniform size of nanoparticles), and succeeded in synthesizing uniform size of nanoparticles in continuous flow active microreactors (a device in which chemical reactions take place in a confinement with dimensions below 1 mm) with support fromSERB,DST.

Nanoparticles possess unique size-dependent properties, which make them useful in biomedical technology but difference in their sizes which arises due to conventional methods of synthesizing them, reduces their efficiency. Maintaining a uniform size of the nanoparticles is a challenge faced by the biomedical industry. Besides, these methods use multiple reagents, are time consuming and produce toxic by-products.

 

Source  pib-

 


एआरआई द्वारा विकसित माइक्रोरिएक्टर से पैदा होते हैं एक समान आकार के नैनो कण


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के अधीन आने वाले पुणे के स्वायत्त संस्थान अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) ने एक ऐसे माइक्रोरिएक्टर का विकास किया है, जो बड़ी मात्रा में एक समान आकार के नैनो कणों का निर्माण कर सकता है। जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए इन कणों को खासा अहम माना जाता है।

सक्रिय माइक्रोरिएक्टर के नियमित प्रवाह के द्वारा यह डिवाइस मेटल, सेमी कंडक्टर और पॉलिमर नैनो कणों का निर्माण कर सकता है। एआरआई में डॉ. धनंजय बोडास और उनकी टीम ने पिछले अध्ययनों के आधार पर इस माइक्रोरिएक्टर के बारे में मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग और एसीएस अप्लायड मैटेरियल्स में प्रकाशन किया। टीम ने यह भी पाया कि कन्संट्रेशन ऑफ रिएक्टेंट्स, प्रवाह दर, एगीटेशन जैसे तापमान प्रतिक्रिया के साथ ही समय जैसे मानदंडों पर नैनोकणों के आकार और उनके वितरण का निर्धारण किया गया है।

उन्होंने आगे वास्तविक मोनोडिस्पर्सिटी (नैनो कणों का एक समान आकार बरकरार रखना) हासिल करने के लिए सटीकता से प्रक्रिया मानकों का अनुमान लगाने को आयामीय विश्लेषण का उपयोग करते हुए एक गणितीय समीकरण निकाला और एसईआरबी, डीएसटी के सहयोग से माइक्रोरिएक्टर्स (ऐसी डिवाइस जिसमें एक मिमी से कम आकार के साथ रासायनिक प्रक्रिया होती है) नियमित सक्रिय प्रवाह से समान आकार के नैनो कण पैदा करने में सफलता हासिल की है।

नैनो कणों में विशेष आकार आधारित गुण होते हैं, जो उन्हें जैव चिकित्सा तकनीक में उपयोगी बनाते हैं लेकिन उनके आकार अलग-अलग होते हैं जिससे उत्पादन के पारंपरिक तरीकों के कारण उनका प्रभाव कम होता है। जैव चिकित्सा उद्योग के लिए नैनो कणों के समान आकार को बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके अलावा कई अभिकर्मकों (रीजेंट) के इस्तेमाल के कारण इन विधियों में समय ज्यादा लगता है और विषाक्त उप उत्पाद पैदा होते हैं।

स्रोत  pib-

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