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On the occasion of centenary year of great archaeologist Prof B. B. Lal, Union Culture Minister  releases e-book “Prof. B. B. Lal -India Rediscovered”  


On the occasion of centenary year of great archaeologist Prof B. B. Lal, Union Culture Minister  releases e-book “Prof. B. B. Lal -India Rediscovered” 


 
 
 
 
On the occasion of centenary year of great archaeologist Professor B. B. Lal, Union Culture Minister Shri Prahlad Singh Patel released an e-book “Prof. B. B. Lal -India Rediscovered” in New Delhi.
 
Prof Lal was born on 02nd may 1921 in village Baidora, District Jhansi, Uttar Pradesh.
 
The book is a centenary special edition which has been prepared by Ministry of culture in collaboration with Prof B B Lal Centenary Celebration Committee.The book is a tribute from Ministry of culture for his immense contribution to the field of archaeology.
 
  • Prof. B. B. Lal was conferred upon Padma Bhushan in the year of 2000.
  • He was the Director General of the Archaeological Survey of India (ASI) from 1968 to 1972 and has served as Director of the Indian Institute of Advanced Studies, Shimla.
  • Prof Lal also served on various UNESCO committees.
  • In a career spanning over five decades Prof Lal made immense contribution to the field of archaeology.
 
Prof Lal was trained by Sir Mortimer Wheeler at Taxila in 1944 and later joined Archaeological Survey of India.  Prof. Lal excavated several important landmark sites including Hastinapura (U.P.), Sisupalgarh (Orissa), Purana Qila (Delhi), Kalibangan (Rajasthan).  From 1975-76 onwards, Prof. Lal investigated sites like Ayodhya, Bharadvaja Ashrama, Sringaverapura, Nandigrama and Chitrakoota under the Archaeology of Ramayana Sites.  Prof. Lal has authored 20 books and over 150 research articles on various national and international journals.
 
 
Source   pib-
 
 
 

महान पुरातत्ववेत्ता प्रो. बी बी लाल के शताब्दी वर्ष के अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने ई-बुक ‘ प्रो. बी बी लाल-इंडिया रिडिस्कवर्ड‘ का विमोचन किया


केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने महान पुरातत्ववेत्ता प्रो. बी बी लाल के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ई-बुक ‘ प्रो. बी बी लाल-इंडिया रिडिस्कवर्ड‘ का विमोचन किया।
 
प्रो. लाल का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में बैडोरा गांव में 02 मई, 1921 को हुआ
 
यह पुस्तक एक शताब्दी विशेष संस्करण हैं जिसे संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रो. बी बी लाल शताब्दी समारोह समिति द्वारा तैयार किया गया है। यह पुस्तक संस्कृति मंत्रालय की पुरातत्व के क्षेत्र में उनके बेशुमार योगदान को संस्कृति मंत्रालय की ओर से सम्मान है।
 
  • प्रो. बी. बी. लाल को वर्ष 2020 में पद्म भूषण प्रदान किया गया था।
  • वह 1968 से 1972 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक थे और उन्होंने भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक के रूप में सेवा की है।
  • प्रो. लाल ने यूनेस्को की विभिन्न समितियों में भी काम किया है।
  • पांच दशकों तक फैले अपने कैरियर में प्रो. लाल ने पुरातत्व विज्ञान के क्षेत्र में बेशुमार योगदान दिया।
 
प्रो. लाल को 1944 में तक्सिला में सर मोर्टिमर व्हीलर द्वारा प्रशिक्षित किया गया था और बाद में वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में नियुक्त हुए। प्रो. लाल ने हस्तिनापुर (उप्र), शिशुपालगढ़ (ओडिशा), पुराना किला (दिल्ली), कालिबंगन (राजस्थान) सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई की। 1975-76 के बाद से, प्रो. लाल ने रामायण के पुरातात्विक स्थलों के तहत अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रंगवेरपुरा, नंदीग्राम एवं चित्रकूट जैसे स्थलों की जांच की। प्रो. लाल ने 20 पुस्तकें और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में 150 से अधिक शोध लेख लिखे हैं। 
 
 
स्रोत   pib-
 
 
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